तीन तलाक: ड्राफ्ट के समर्थन में आगे आया यूपी

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लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तीन तलाक पर लगाम नहीं लगी, जिसके बाद सरकार ने तय किया कि वह इस गंभीर मुद्दे पर कानून बनाएगी। इसके बाद ड्राफ्ट ‘मुस्लिम विमिन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज बिल’ को राज्य सरकारों के पास भेजा गया। केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए इस ड्राफ्ट का समर्थन सबसे पहले उत्तर प्रदेश ने किया है। बता दें कि कानून बनने के साथ ही तीन तलाक देना गैर-जमानती और गंभीर अपराध माना जाएगा।




इस ड्राफ्ट को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने तैयार किया है। समूह के अन्य सदस्यों में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद और मंत्रालय में उनके जूनियर पी. पी. चौधरी शामिल हैं। यह प्रस्तावित कानून केवल एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामलों पर ही लागू होगा।

कानून बनने के बाद
कानून बनने से पीड़ितों को अधिकार मिल जाएगा, जिससे वे मैजिस्ट्रेट के पास जाकर अपने और बच्चों के लिए गुजारा भत्ते की मांग कर सकें। इतना ही नहीं, महिला मैजिस्ट्रेट से अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने की भी मांग कर सकती है। कानून के मसौदे के तहत ट्रिपल तलाक किसी भी रूप में- बोलकर, लिखित या ईमेल, SMS और वॉट्सऐप से अवैध और अमान्य होगा।




सरकारी अधिकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को उम्मीद थी कि यह प्रथा खत्म हो जाएगी लेकिन यह अब भी जारी है। इस साल फैसले से पहले एक बार में तीन तलाक देने के 177 मामले दर्ज हुए जबकि फैसले के बाद 66 केस सामने आए। इसमें उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं। इसके बाद ही सरकार ने कानून बनाने का फैसला लिया।

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