राष्ट्रपति ने तीसरे कृषि रोडमैप का किया शुभारंभ

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पटना. बिहार के तीसरे कृषि रोडमैप का शुभारंभ करने के बाद गुरुवार को बाबू सभागार में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि बिहार से जो स्नेह मिला उसको भूल नहीं सकता। यही से ही राष्ट्रपति भवन पहुंचा। यहां की धरती अन्नापूर्णा है। बिहार के किसान बाढ़ और सुखा के बाद भी अनाजों का अच्छा उत्पादन कर रहते हैं। यही कारण है कि बिहार को कई बार कर्मण पुरस्कार मिल चुका है। 
– कोविंद ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति भ‌वन में रोज प्रणाम करता हूं। मेरे कक्ष में भी राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा है।
– बिहार के आरा के वीर कुंवर सिंह और बक्सर के शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान को भुलाया नहीं जा सकता है।
– कोविंद ने कहा कि बिहार में कृषि रोड मैप के कारण धान के उत्पादन में वृद्धि आई है। खाद्यानों के अच्छा उपज के कारण ही बिहार को कई बार कर्मण पुरस्कार मिल चुका है।
– बिहार में जैविक खेती के लिए प्रतिकुल परिस्थितियां है। जिसको लेकर काम भी किया जा रहा है।
– कोविंद ने कहा कि किसानों के अनाजों को सही कीमत के लिए मार्केटिंग करने की जरूरत है। जिससे अच्छी कीमत मिल सके।
– बिहार में वाटर मैनेजमेंट पर ध्यान देने की जरूरत है। जिससे बाढ़ और सूखा से किसानों को राहत मिलेगी।
– बिहार में सुधा डेयरी ने सफलता के बाद दिल्ली समेत कई राज्यों में अपना उत्पाद पहुंचा रही है।
– छठ के दौरान ठेकुआ सुधा ने राष्ट्रपति भवन को भेजा था। बिहार के लोग कई देशों में उच्च पदों पर तैनात हैं और बिहार का गौरव बढ़ा रहे हैं।
एयरपोर्ट पर राज्यपाल और सीएम ने किया स्वागत
– राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गुरुवार को पटना पहुंचे। एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक, सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील मोदी समेत कई मंत्रियों ने स्वागत किया।
– इस दौरान राष्ट्रपति ने राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
– एयरपोर्ट से राष्ट्रपति का काफिला सीधे बाबू सभागार पहुंचा। सभागार में राष्ट्रपति ने दीप जलाकर 1 लाख 54 हजार करोड़ के बिहार के तीसरे कृषि रोडमैप को शुभारंभ किया।
जाने कृषि रोड मैप 2017-2022 को
राज्य का तीसरा कृषि रोड मैप 2017-22 का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ज्ञान भवन के बापू सभागार करेंगे। इसके पहले दूसरा कृषि रोड मैप 2012-17 का शुभारंभ एसकेएम में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ने किया था। कृषि रोड मैप का मुख्य उद्देश्य राज्य में फसल, सब्जी, दलहन, तेलहन, फल, दूध, मांस, मछली और अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भर ही नहीं निर्यातक की स्थिति में आने का है। बिहार में 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। इसलिए राज्य सरकार ने पहली बार 2008 में कृषि रोड मैप शुरू किया। यह रोड मैप 2012 तक के लिए था।
कृषि रोडमैप का प्रारूप कृषि विशेषज्ञ डॉ. मंगला राय ने तैयार किया था। उस समय रोड मैप में श्रीविधि से पंक्ति में धान की रोपनी शुरू हुई। बीज प्रतिस्थापन दर (पुराने की जगह नए बीज का प्रयोग) बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। पहले जहां 5 प्रतिशत भी नए बीज का प्रयोग नहीं होता था। आज कृषि रोड मैप के कारण ही धान का 35 प्रतिशत नए बीज का प्रयोग होने लगा। इसी प्रकार गेहूं, दलहन व तेलहन में हुआ। रोड मैप में अनाज भंडारण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। पहले 3 लाख टन ही राज्य में अनाज भंडारण क्षमता था। रोड मैप की योजनाओं के कारण आज भंडारण क्षमता 13 लाख टन हो गया है। पिछले 10 वर्षों में कृषि रोड मैप के कारण अनाज उत्पादन में डेढ़ से दो गुना वृद्धि हुई है। तकनीकी तौर पर किसान समृद्ध हुए है। रोड मैप में ही कृषि यांत्रिकीकरण का लक्ष्य तय किया गया था। आज गांवों में मजदूरों की कमी मशीन कर रही है। कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई हो रही है। रोपनी, बुआई से लेकर जुताई तक के लिए विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े कृषि यंत्र किसानों के खेतों में आ गए हैं। कृषि रोड मैप में किसानों को कृषि यंत्र पर विशेष सब्सिडी देने का लक्ष्य रखा गया। किसानों को नए फसल उत्पादन के साथ ही मछली उत्पादन, अंडा और मांस उत्पादन के लिए प्रशिक्षण के बिहार के साथ बाहर के राज्यों में भेजा जाने लगा। इसका असर दिखने भी लगा है। बिहार राज्य में कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान 18 प्रतिशत, जबकि राष्ट्रीय औसत 14 प्रतिशत है बिहार की कृषि पर जनसंख्या का दबाव अधिक है।
91 प्रतिशत राज्य के किसान हैं सीमांत
राज्य में कृषि के विकास के लिए प्राकृतिक संसाधन एवं उपजाऊ मिट्टी, जल एवं कृषि जलवायवीय परिस्थितियां हैं। बावजूद हम फसल सहित बागवानी, दूध उत्पादन, मांस, मछली उत्पादन की प्रति इकाई उत्पादकता संभावना की तुलना में कम है।
कुछ उपलब्धियां मिलीं
– 2012 में चावल, 2013 में गेहूं एवं 2016 में मक्का के उत्पादन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया है।
– 2012 में नालंदा में 224 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान और 729 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आलू का उत्पादन का विश्व रिकार्ड बना।
– कृषि रोड मैप लागू करने के पहले राज्य में औसतन चावल का उत्पादन 44 लाख टन प्रति वर्ष था, जो कृषि रोड मैप लागू होने के बाद बढ़ कर 76.67 लाख टन हो गया है।
खेतों में हरी खाद और जैविक खेती पर जोर
तीसरा कृषि रोड मैप में जैविक खेती पर जोर है। गंगा किनारे के गांवों को जैविक खेती से जोड़ना है। राष्ट्रीय राजमार्ग और राजकीय राजमार्ग के दोनों किनारे के गांवों को चिह्नित कर चरणबद्ध तरीके से जैविक गांव घोषित करना है। जैविक खेती के लिए तमाम योजनाओं की सुविधा इन गांवों के किसानों को देना है। डीजल की बजाय बिजली चालित पंप सेट पर जोर है। हरित क्रांति से लाभान्वित हुए पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में अब ठहराव की स्थिति आ गयी है। बिहार में हर साल में तीन-तीन फसलों की संभावना है। इसलिए प्रत्येक खेत में हरी खाद, जैव उर्वरक और वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करने की योजना बनाई गई है। लघु और सीमांत किसानों के लिए कृषि यंत्र बैंक की स्थापना का भी लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को खेतों में पुआल जलाने से रोकने के लिए यंत्र पर अनुदान
किसानों को धान की पुआल खेत में जलाने से रोकने के लिए पैडी स्ट्रॉ, ट्रैक्टरचालित चैफ कटर, स्ट्रॉ कंबाईन, स्ट्रॉ बेलर और रैक पर अनुदान देने का प्रस्ताव किया गया है। राज्य में पांच पशु विज्ञान व अन्य संस्थान की स्थापना करना है। वन क्षेत्र को वर्ष 2022 तक बढ़ा कर 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
पॉल्टी फार्म खोलना है
पांच हजार क्षमता वाले 2200 पोल्ट्री फार्म के लिए 330 करोड़ जबकि 10 हजार क्षमता वाले 475 पोल्ट्री फार्म के लिए 121 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पूरे राज्य में 2.74 लाख बकरी फार्म की स्थापना के लिए 3640 करोड़ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। खाद्य और पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए खाद्यान्न के साथ-साथ फल, सब्जी, दूध, मछली, अंडा और मांस की वर्ष 2022 की जरूरतों को पूरा करने की योजना बनाई गई है।
उत्तर बिहार की नदियों का अतिरिक्त पानी दक्षिण बिहार की नदियों पर पहुंचाने का लक्ष्य
गंगा में पंपिंग स्टेशन स्थापित करके उत्तर बिहार की नदियों का अतिरिक्त पानी दक्षिण बिहार की नदियों में पंप नहर से डालने की योजना बनाई गई है। इससे उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा भी कम हो सकता है और दक्षिण बिहार में खेतों तक पानी भी पहुंचाया जा सकता है।

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