गुजरात : UP सीएम योगी आदित्यनाथ ‘पूर्वांचल’ में, एक हफ्ते तक करेंगे प्रचार

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बीजेपी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश में ‘पूर्वांचल’ को संभालने की जिम्मेदारी सीएम योगी आदित्यनाथ के जिम्मे होगी। गुजरात के उन जिलों में जहां यूपी-बिहार के लोग काफी संख्या में रहते हैं, वहां योगी का सघन प्रचार कार्यक्रम तय किया गया है। योगी अलग-अलग तारीखों में गुजरात में एक सप्ताह से अधिक बिताएंगे। यूपी से बाहर यह उनका अब तक का सबसे बड़ा प्रचार अभियान होगा। इससे पहले भी गुजरात में निकाली गई पार्टी की गौरव यात्रा की भी योगी ने 13-14 अक्टूबर को अगुवाई की थी।

हिमाचल और गुजरात में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। पहाड़ की पृष्ठभूमि और लोकप्रियता के चलते हिमाचल प्रदेश में भी योगी का करीब तीन-चार दिन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। पहले चरण में 29 अक्टूबर को योगी हिमाचल प्रदेश जा रहे हैं, जहां उनका दो दिन का कार्यक्रम है। हालांकि, यूपी के निकाय चुनाव के बीच यहां के बाद वह सबसे ज्यादा वक्त गुजरात को ही देंगे। गुजरात में निकाली गई पार्टी की गौरव यात्रा की भी योगी ने 13-14 अक्टूबर को अगुवाई की थी। सूत्रों की मानें तो गुजरात में चुनाव प्रचार की जो रूपरेखा बनाई गई है, उसके हिसाब से गुजरात में बाहर के नेताओं में योगी आदित्यनाथ का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो सकता है।

दक्षिण गुजरात पर फोकस
गौरव यात्रा के दौरान भी योगी की सभाएं नवसारी, बलसाड़ और सूरत जैसे जिलों में हुई थीं, जो दक्षिण गुजरात का हिस्सा हैं। बीजेपी की गुजरात इकाई की एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि दक्षिण गुजरात में यूपी-बिहार के 15 लाख से अधिक लोग रहते हैं। इसलिए योगी के कार्यक्रम अधिकतर उन जिलों और स्थानों पर करवाए जाने की योजना है, जहां उत्तर भारतीयों की अच्छी संख्या है। चुनाव में संगठनात्मक सहयोग के लिहाज से भी बीजेपी यूपी के प्रदेश महामंत्री और प्रदेश सरकार में मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्रदेव सिंह को भुज व आस-पास के क्षेत्रों में चुनाव प्रबंधन में लगाया गया है। वहीं राष्ट्रीय मंत्री और यूपी सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री महेंद्र सिंह को भी अहमदाबाद के आस-पास के क्षेत्रों में चुनाव प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है।

‘परंपरागत’ फॉर्म्युले के लिए भी अहम
जिस ‘गुजरात मॉडल’ ने मोदी की छवि को राष्ट्रीय बनाकर उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया, इस बार विधानसभा चुनाव में विपक्ष का हमला उसी मॉडल पर सर्वाधिक है। गुजरात में उभरी युवा तिकड़ी हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकुर ने बीजेपी का मुखर विरोध कर वोटों के जातीय विभाजन की संभावनाओं को मजबूत किया है। इसकी काट के लिए विकास के साथ राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के परंपरागत अजेंडे को भी धार दिए जाने की योजना है। योगी आदित्यनाथ इस परंपरागत फॉर्म्युले पर भी पूरी तरह से फिट बैठते हैं। व्यक्तिगत तौर पर केरल, हिमाचल से लेकर गुजरात तक पार्टी के चेहरे के तौर पर पेश किया जाना योगी आदित्यनाथ के लिए भी एक अहम अवसर है। खासकर पीएम के गृह प्रदेश में चुनावी ट्रंप के तौर पर इस्तेमाल किया जाना आगे की उनकी बड़ी भूमिका की जमीन तैयार करेगा।

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