बिहार : भाई दूज में क्यों बहनें भाई को खिलाती हैं बजरी

0 98

भाई दूज पर्व भाइयों के प्रति बहनों की श्रद्धा और विश्वास का पर्व है। इस पर्व को हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि के दिन मनाया जाता है। पर्व के दिन बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और भगवान से भाइयों की लंबी आयु की कामना करती हैं। लेकिन बिहार में इसकी अनोखी परंपरा है। आइए जानते हैं इस विशेष परंपरा के बारे …..

बिहार में भाई दूज, कहीं बजरी कहीं टीका

भाई दूज के दिन बिहार में बहनें अपनी भाईयों को पारंपरिक तरीके से बजरी खिलाती है। बजरी को खिलाने के पीछे माना जाता है कि भाई खूब मजबूत बनता है। बहनें अपने भाईयों को पहले खूब कोसती हैं फिर अपनी जीभ पर कांटा चुभाती हैं और अपनी गलती के लिए भगवान से माफी मांगती हैं।

इसके बाद भाई अपनी बहन को आशर्वाद देते हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन भाइयों को गालियां व श्राप देने से उन्हें यम (मृत्यु) का भय नहीं रहता।

गोधन कूटने की परंपरा

इस दिन गोधन कूटने की प्रथा भी है। गोबर की मानव मूर्ति बना कर छाती पर ईंट रखकर स्त्रियां उसे मूसलों से तोड़ती हैं। स्त्रियां घर-घर जाकर चना, गूम तथा भटकैया चराव कर जिव्हा को भटकैया के कांटे से दागती भी हैं। दोपहरपर्यन्त यह सब करके बहन भाई पूजा विधान से इस पर्व को प्रसन्नता से मनाते हैं।

भैया दूज के दिन बहनें पहले क्यों देती हैं भाई को श्राप

इसके पीछे एक प्राचीन कहानी है। राजा पृथु के पुत्र की शादी थी। उसने अपनी विवाहिता पुत्री को भी बुलाया। दोनों भाई बहन में खूब स्नेह था। जब बहन भाई की शादी में शामिल होने आ रही थी, तो रास्ते में उसने एक कुम्हार दंपति को बातें सुना। वे कह रहे थे कि राजा कि बेटी ने अपने भाई को कभी गाली नहीं दी है। वह बारात के दिन मर जाएगा। यह सुनते ही बहन अपने भाई को कोसते हुए घर गई।

भाई के लिए बहन ने यमराज से मांगा था वरदान

बारात निकलते वक्त रास्ते में सांप, बिच्छू जो भी बाधा आती उसे मारते हुए अपने आंचल में डालते गई। वह घर लौटी तो वहां यमराज पहुंच गए। यमराज भाई के प्रति बहन…यमराज भाई के प्रति बहन के स्नेह को देखकर प्रसन्न हुए और कहा कि यम द्वितीया के दिन बहन अपने भाई को गाली व श्राप दे, तो भाई को मृत्यु का भय नहीं रहेगा। भाई दूज पर उत्तर भारतीयों की यह परंपरा सचमुच अनोखी परंपरा है।

मिथिलांचल में भरदुतिया

बिहार में भैया दूज को अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। मिथिलांचल में इसे भ्रातृ द्वितीया या भरदुतिया कहते हैं। बहन अपने भाई की लंबी आयु की कामना करते हुए भाई को टीका लगाती हैं।

टीका लगाने के बाद उसके हाथ में पान सुपारी डालकर भगवान से प्रार्थना करती हैं कि हे भगवान जैसे यम ने यमुना की प्रार्थना सुनी वैसे ही आप मेरी भी प्रार्थना सुनिए और मेरे भाई पर आने वाले हर संकट को दूर कर दीजिए। मेरे भाई को दीर्घायु कीजिए।

परंपरा कोई भी हो इसमें बसा है सिर्फ भाई बहन का प्यार

कहीं-कहीं बहनें इस दिन बेरी पूजन भी करती हैं और भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगलकामना करके तिलक लगाती हैं और इस दिन सभी भाई अपनी बहन के घर ही भोजन करते हैं। कहा जाता है कि यम ने भी अपनी बहन यमुनी के घर भोजन कर उन्हें शाप मुक्त किया था। परंपरा कोई भी हो इसमें केवल भाई बहन का प्यार बसा है। भाई बहन का प्यार दुनिया का सबसे प्यारा बंधन होता है।

भाई दूज के पीछे ये हैं मान्यता

मान्यता के अनुसार इस दिन जो यम देव की उपासना करता है, उसे असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनके जीवन की मंगल कामना करती हैं। माना जाता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में अगर भाई और बहन साथ में यमुना नदी में स्नान करें तो भाई और बहन का रिश्ता हमेशा ना रहता है और भाई की उम्र बढ़ती है। भाई दूज को भाऊ बीज और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

भाई दूज 2017: भाइयों के प्रति बहनों के विश्वास का पर्व, जानें कब है मुहूर्त

भाई दूज शुभ मुहूर्त:

टीका का शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:19 से 3:36 बजे तक.

द्वितीय तिथि प्रारम्भ : 21 अक्टूबर 2017 को 01:37 बजे तक.

द्वितीय तिथि समाप्त : 22 अक्टूबर 2017 को 03:00 बजे तक.

इस विधि से करें भाई का टीका

– सबसे पहले बहनें चावल के आटे से चौक तैयार करें

– इस चौक पर भाई को बैठाए फिर उनके हाथों की पूजा करें। इसके लिए भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाएं।

– इसके बाद इसमें सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोलें।

भाई दूज पर यमराज की पूजा से चमकेगी किस्मत, इन चीजों को करना न भूलें

– किसी-किसी जगह पर इस दिन बहनें अपने भाइयों की आरती भी उतारती हैं और फिर हथेली में कलावा बांधती हैं। भाई का मुंह मीठा करने के लिए भाइयों को मिश्री या मिठाइयां खिलाना चाहिए।

– शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर दीये का मुख दक्षिण दिशा की ओर करके रखें।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Bitnami