कैफियत एक्सप्रेस हादसा में जर्मन कोचों की वजह से बच गई रेल यात्रियों की जान

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उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बुधवार रात कैफियत एक्सप्रेस के 10 डिब्बे पटरी से उतर गए. आजमगढ़ से दिल्ली आ रही इस ट्रेन के हादसे के शिकार होने के कारण कम से कम 74 लोग घायल हुए है. यूपी में पिछले पांच दिनों के अंदर यह दूसरी बड़ी ट्रेन दुर्घटना है, हालांकि यहां राहत की बात रही कि इस बड़े हादसे के बावजूद इसमें किसी यात्री की जान जाने की खबर नहीं और न ही किसी को गंभीर चोटें आई हैं.

दरअसल कैफियत एक्सप्रेस में जर्मन तकनीक से बने हुए लिंक-हॉफमैन बुश (LHB) कोच लगे हुए हैं और इसी वजह से इस बड़े हादसे में अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ. ये कोच ऐसी तकनीक से लैस हैं, जिनसे हादसे के बाद ये न तो पलटते हैं और न ही एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते हैं. इन कोच का बाहरी हिस्सा जहां स्टेनलेस स्टील से बना होता, वहीं अंदरूनी हिस्से अल्यूमिनयम के होते हैं, इससे ये पारंपरिक कोचों की तुलना में ज्यादा हल्के और सुरक्षित होते हैं. इसके अलावा यहां हर कोच में एक अलग उन्नत न्यूमैटिक डिस्क ब्रेक लेग होते हैं, जिससे तेज गति से चलने के दौरान भी ट्रेन को आसानी से और जल्दी रोका जा सकता है.

भारतीय रेल ने वर्ष 2000 से ही इन LHB कोच का इस्तमेाल शुरू किया था. इसमें एक कोच को बनाने में डेढ़ से दो करोड़ रुपये की लागत आती है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2017 तक सभी ट्रेनों में ये उन्नत कोच लगाने की घोषणा की थी. हालांकि मौजूदा वक्त में राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी, दुरंतो, अंत्योदय, हमसफर और गतिमान जैसे प्रीमियम ट्रेनों सहित कुल 75 ट्रेनों में ये कोच लगे हैं.

गौरतलब है कि कैफियत एक्सप्रेस से पहले उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर के खतौली के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में हताहतों की तादाद इसलिए ज्यादा रही, क्योंकि इस गाड़ी में पुरानी तकनीक के डिब्बे लगे हुए थे.

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