सूतक से टूटी दशाश्वमेध घाट की आरती की परम्परा

गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित होने वाली सायंकालीन दैनिक गंगा आरती की 26 साल पुरानी परंपरा को सूतक काल के कारण तोड़ना पड़ा।

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गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित होने वाली सायंकालीन दैनिक गंगा आरती की 26 साल पुरानी परंपरा को सूतक काल के कारण तोड़ना पड़ा। सोमवार  को दोपहर 12:40 बजे प्रारम्भ हुई एवं इसका समापन 01:20 बजे हुआ। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से पूर्व देवालयों के कपाट बंद होने की परंपरा है।

जिसे देखते हुए दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध दैनिक गंगा आरती का भी समय आयोजको द्वारा परिवर्तित करते हुए दोपहर में संमपन्न कराया गया। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी सुशांत मिश्र, आशीष तिवारी, हनुमान यादव एवं सुरजीत कुमार सिंह उपस्थित रहे।

सावन के आखिरी सोमवार को काशी में जुटे कांवड़ियों को ग्रहण के सूतक के चलते बाबा का स्पर्श करने को नहीं मिला। मंदिर की चौखट से ही दर्शन करने का अवसर मिला। काशी में चंद्रग्रहण का सूतक लगने के साथ ही विश्वनाथ मंदिर का गर्भ गृह दोपहर 1:57 पर बंद कर दिया गया। वाराणसी के अलावा अयोध्या में भी मंदिरों के कपाट बंद रहे।

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