कुख्यात नक्सली का खुलासा- सुकमा में ऐसे उतारा था 25 जवानों को मौत के घाट

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में बुरकापाल हमले में शामिल नक्सली पोडियम पंडा ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. पोडियम ने पुलिस के सामने 19 बड़ी नक्सल वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की है. इस कुख्यात नक्सली के सर पर एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया था. इसी नक्सली ने सुकमा के पूर्व कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को भी अगवा किया था. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है.

सुकमा SP अभिषेक मीणा ने बताया कि पिछले महीने जिले के बुरकापाल हमले में शामिल जनमिलिशिया डिप्टी कमांडर और नक्सली सहयोगी पोडियाम पांडू उर्फ पंडा (45) ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. पंडा ने 9 मई को सरेंडर किया था, जिसका खुलासा अब जाकर हुआ है. पुलिस द्वारा पूछताछ में उसने बताया कि उसने दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुलाकात नक्सली नेताओं से करवाने में मदद की थी.

उन्होंने बताया कि पोडियाम पंडा चिंतागुफा गांव का पूर्व सरपंच है. वर्तमान में उसकी पत्नी गांव की सरपंच है. नक्सली बुरकापाल में हमले की तैयारी पहले से ही कर रहे थे. वह 15 अप्रैल से ही चिंतागुफा और बुरकापाल में सुरक्षा बलों पर नजर रख रहे थे. इसके बाद ही 24 अप्रैल को घटना को अंजाम दिया गया. इसमें सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे. सीआरपीएफ टीम के निकलते ही नक्सली सक्रिय हो गए थे.

ऐसे दिया बुरकापाल हमले को अंजाम
पंडा ने पुलिस को बताया कि घटना के दिन 24 अप्रैल को सीआरपीएफ का दल जब अपने शिविर से निकला तब इसकी जानकारी नक्सली सदस्यों ने अपने कमांडरों तक पहुंचाई. इस दौरान हथियारबंद नक्सली बुरकापाल से लगभग आठ किलोमीटर दूर कासलपाड़ा गांव के करीब मौजूद थे. जानकारी मिलने के बाद नक्सलियों ने एक घंटे के दौरान ही क्षेत्र में घेराबंदी की और 11.30 बजे पुलिस दल पर हमला शुरू कर दिया.

माओवादी कमांडर को सौंपे हथियार
इस हमले के समय पंडा इंसास रायफल से गोलीबारी कर रहा था. पंडा और उसके साथियों ने जवाबी कार्रवाई के दौरान घायल नक्सलियों और मारे गए नक्सली कमांडर अनिल के शव को कासलपाड़ा गांव पहुंचाया. इसके बाद पंडा अपना हथियार माओवादी कमांडर अर्जुन को सौंप दिया और अपने गांव लौट गया. इस महीने की सात तारीख को पंडा चिंतागुफा थाने की पुलिस के संपर्क में आया और सरेंडर कर दिया.

2016 में बना मिलिशिया डिप्टी कमांडर
साल 1997 में पोडियाम पांडू माओवादी नेता रमन्ना, हिड़मा, मदन्ना, पापाराव और सीतू के संपर्क में आया था. इस दौरान वह नक्सलियों के कुरियर के रूप में काम करता था. उनके लिए जरूरी सामान शहरों से लाता था. साल 2014 में वह अपना गांव छोड़कर मिनपा चला गया. वहां वह दुलेड़ जनताना सरकार में मिलिशिया सदस्य के रूप में कार्य करने लगा. साल 2016 में वह मिलिशिया डिप्टी कमांडर बन गया.

पोडियाम पंडा के प्रमुख ऑपरेशन
2010 में ताड़ेमटला हमला- 76 जवान शहीद
2014 में कासलपाड़ा हमला- 14 जवान शहीद
2012 में सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का अपहरण
2017 बुरकापाल हमला- 25 जवान शहीद

21 नक्सलियों ने भी किया सरेंडर
बस्तर जिले में तीन ईनामी नक्सलियों समेत 21 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. इनमें एक महिला नक्सली भी शामिल है. बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा, उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा क्षेत्र सुंदरराज पी के सामने नक्सलियों ने सरेंडर किया है. सरेंडर करने वाले नक्सलियों में लक्ष्मण मड़कामी पर दो लाख रुपये का ईनाम घोषित है. वह क्षेत्र में मिलिट्री प्लाटून नंबर 26 का सदस्य है.

नक्सलियों की विचारधारा से परेशान
नक्सली भारसुराम मंडाली जनमिलिशिया कमांडर है. अर्जुन कश्यप कुतुल एलओएस का सदस्य है. दोनों के सिर पर एक-एक लाख रुपये का ईनाम घोषित है. सरेंडर करने वाले अन्य 18 नक्सलियों में महिला नक्सली मंगली मरकाम भी शामिल है. मंगली चेतना नाट्य मंडली की सदस्य है. नक्सलियों ने पुलिस को बताया कि वह नक्सलियों की खोखली विचारधारा तथा हिंसा से परेशान हैं. समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं.

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